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जीवन बीमा बाजार पर आपको मिलती है योजनाओं, पॉलिसी सेवाओं और बिक्री रणनीतियों से जुड़ी सही और विस्तृत जानकारी। यहाँ हर एजेंट, फील्ड ऑफिसर और पॉलिसीधारक के लिए है भरोसेमंद मार्गदर्शन, ताकि आज लिए गए निर्णय आपके कल को सुरक्षित बना सकें।

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जीवन बीमा बाजार आपके साथ है, ताकि बीमा से जुड़ी सही और सरल जानकारी हर किसी तक पहुँच सके। यहाँ योजनाओं, पॉलिसी सेवाओं और बिक्री रणनीतियों पर मिलने वाला मार्गदर्शन न सिर्फ़ आपके काम को आसान बनाता है, बल्कि आपके आत्मविश्वास को भी मज़बूत करता है। चाहे आप बीमा एजेंट हों, फील्ड अधिकारी हों या पॉलिसीधारक - हम आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं, ताकि आज के आपके फैसले कल को और सुरक्षित बना सकें।

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हमारा विज़न : सही जानकारी, सशक्त भविष्य

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जीवन बीमा बाजार में हमारा विश्वास है कि बीमा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि सुरक्षित और बेहतर जीवन की ओर बढ़ाया गया कदम है। हमारा प्रयास है कि हर एजेंट, फील्ड अधिकारी और पॉलिसीधारक को सही जानकारी और सरल मार्गदर्शन मिले — ताकि आज लिया गया निर्णय कल को मजबूत बना सके।

हमारा उद्देश्य है एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनाना, जहाँ ज्ञान से विश्वास पैदा हो और विश्वास से हर जीवन और भी सशक्त हो सके।

रितेश कुमार उपाध्याय

संस्थापक: जीवन बीमा बाजार

14 जनवरी 2026

   

JFM 2026: इंश्योरेंस टारगेट 100% पूरा करने के 5 मंत्र

इंश्योरेंस टारगेट 100% पूरा करने के 5 मंत्र
Also available in English

साथियों, कैलेंडर बदल चुका है! हम 2026 की सबसे महत्वपूर्ण तिमाही यानी JFM (January, February, March) में प्रवेश कर चुके हैं। इंश्योरेंस की दुनिया में एक पुरानी कहावत है— "जो साल भर सोता है, वो JFM में जागकर भी बाजी मार सकता है, लेकिन जो JFM में सो गया, उसका पूरा साल बेकार है।"

क्या आप एक साधारण एजेंट बनकर रहना चाहते हैं या एक 'सुपर अचीवर' (MDRT/COT/TOT) बनना चाहते हैं? यह फैसला आपको अगले 90 दिनों में लेना है। हम जानते हैं कि मार्च क्लोजिंग का दबाव (Pressure) बहुत ज्यादा होता है, ब्रांच मैनेजर का फोन बार-बार आता है, लेकिन याद रखें—दबाव में ही हीरा बनता है।

इस विस्तृत गाइड में हम आपको हवा-हवाई बातें नहीं, बल्कि फील्ड और डिजिटल दुनिया (Digital World) के ऐसे प्रैक्टिकल मंत्र बताएंगे जो 2026 में गेम चेंजर साबित होंगे। साथ ही, खाड़ी देशों (Gulf) में रहने वाले हमारे कामगार भाइयों और NRI क्लाइंट्स के लिए भी इसमें विशेष टिप्स जोड़े गए हैं।

अपना 'हॉट डेटाबेस' अभी फ़िल्टर करें (Smart Data Strategy)

हवा में तीर चलाने का समय अब गया। JFM 2026 में समय कम है, इसलिए आपको 'हार्ड वर्क' नहीं 'स्मार्ट वर्क' करना होगा। अपनी पुरानी डायरी, मोबाइल कॉन्टैक्ट्स या एक्सेल शीट निकालें और अपने ग्राहकों को इन तीन श्रेणियों (Categories) में बांटें। यह हाई-कन्ववर्जन (High Conversion) लिस्ट है:

  • Tax Seekers (टैक्स बचाने वाले):

    वे वेतनभोगी (Salaried) लोग जिनकी आय पिछले साल बढ़ी है। मार्च आते-आते HR उनसे इन्वेस्टमेंट प्रूफ मांगता है। उन्हें सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने की सख्त जरूरत होती है। उन्हें सही समय पर सही (Tax Saving Plan) पिच करें, इससे पहले कि वे जल्दबाजी में कोई गलत फैसला लें।

  • Family Additions (जिम्मेदारी बढ़ने वाले):

    अपने उन पुराने क्लाइंट्स को कॉल करें जिनके घर पिछले 1-2 साल में शादी हुई है या नन्हे मेहमान (बच्चे) का आगमन हुआ है। जब परिवार बढ़ता है, तो पुराने सम एश्योर्ड (Sum Assured) से काम नहीं चलता। जिम्मेदारी बढ़ी है, तो बीमा सुरक्षा (Insurance Cover) भी बढ़ना चाहिए।

  • Upcoming Maturities (परिपक्वता राशि):

    जिन ग्राहकों की कोई पुरानी पॉलिसी (जैसे मनी बैक या एंडोमेंट) अगले 3 से 6 महीने में मैच्योर होने वाली है, वे आपके लिए 'हॉट केक' हैं। उनके पास पैसा आने वाला है। उन्हें समझाएं कि मैच्योरिटी का पैसा खर्च करने के बजाय उसे एक 'पेंशन प्लान' (Pension Plan) या 'लमसम निवेश' (Lumpsum Investment) में रि-इन्वेस्ट करना उनके सुरक्षित बुढ़ापे के लिए कितना जरूरी है।

Satark टिप: क्लाइंट को कभी भी फोन पर पूरी स्कीम न समझाएं। फोन का मकसद सिर्फ और सिर्फ 'अपॉइंटमेंट' (Meeting) फिक्स करना होना चाहिए। फोन पर प्लान बताने से पॉलिसी बिकने के चांस 50% कम हो जाते हैं।

'Tax Saving' नहीं, 'Suraksha + Returns' बेचें

JFM सीजन में हर एजेंट ग्राहक के पास "सर, टैक्स बचा लो" का नारा लेकर जाता है। अगर आप भी यही करेंगे, तो भीड़ का हिस्सा बन जाएंगे और ग्राहक आपको टाल देगा। आपको एक सेल्समैन नहीं, बल्कि एक वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) की तरह बात करनी है।

बातचीत का तरीका बदलें (Pitch Script)

ग्राहक को समझाएं: "सर, टैक्स बचाना तो सिर्फ एक 'बोनस' है। हमारा असली मकसद दो चीजें हैं:

  • आपके न रहने पर आपके परिवार की लाइफस्टाइल वैसी ही रहे, जैसी आज है।
  • आपके रहने पर एक शानदार रिटायरमेंट फंड (Retirement Fund) तैयार हो, ताकि बुढ़ापे में किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े।
"

जब आप ROI (Return on Investment) और भावनात्मक सुरक्षा को जोड़कर बात करते हैं, तो प्रीमियम का चेक अपने आप बड़ा हो जाता है।

सावधानी (Caution):

कभी भी शॉर्ट टर्म फायदों के लिए लॉन्ग टर्म कमिटमेंट न करवाएं। अगर ग्राहक केवल 5 साल ही पैसा दे सकता है, तो उसे 15 साल का प्रीमियम पेइंग टर्म (PPT) न दें। इससे मिस-सेलिंग (Mis-selling) का खतरा बढ़ता है और बाद में पॉलिसी लैप्स हो जाती है, जिससे आपकी साख (Goodwill) खराब होती है।

NRI और गल्फ (Gulf) क्लाइंट्स: एक अनछुआ खजाना

जनवरी और फरवरी का महीना वो समय होता है जब खाड़ी देशों (Dubai, Qatar, Saudi Arabia, Kuwait) और US/UK में काम करने वाले हमारे भारतीय भाई-बहन छुट्टियों पर अपने वतन भारत आते हैं।

NRI डे (9 जनवरी) का फायदा कैसे उठाएं?

हर साल 9 जनवरी को भारत में 'प्रवासी भारतीय दिवस' मनाया जाता है। जनवरी का पूरा महीना NRIs के स्वागत का होता है।

  • अवसर: अधिकांश NRI अभी भी भारत में हैं या फरवरी तक रहेंगे। यह उनसे मिलने का सही समय है।
  • कनेक्शन: वे अपनी जड़ों से जुड़ना चाहते हैं। उन्हें समझाएं कि भारत में निवेश करना उनके लिए 'इमोशनल' और 'फाइनेंशियल' दोनों तरह से फायदेमंद है।

NRIs के लिए बेस्ट इंश्योरेंस रणनीति:

गल्फ में काम करने वाले हमारे 'ब्लू कॉलर' (Blue Collar) भाई कड़ी मेहनत करते हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता होती है— "अगर मुझे वहां कुछ हो गया, तो गांव में मेरे परिवार का क्या होगा?" या "जब मैं 5 साल बाद भारत लौटूंगा, तो मेरी आमदनी का जरिया क्या होगा?"

  • टर्म प्लान (Term Insurance): उन्हें समझाएं कि उनकी गैर-मौजूदगी में एक बड़ा Life Cover उनके परिवार को कर्ज मुक्त रख सकता है।
  • गारंटीड इनकम प्लान: NRIs को ऐसे प्लान पसंद आते हैं जहां भारत लौटने के बाद उन्हें एक निश्चित मासिक आय (Monthly Income) मिले, ताकि उन्हें दोबारा विदेश न जाना पड़े।

JBB Satark Advice (जरूरी नियम): NRI पॉलिसी करते समय पासपोर्ट (Passport) और वीज़ा (Visa) की वैधता (Validity) पहले दिन ही चेक कर लें। अगर वे 10 दिन में वापस जाने वाले हैं, तो मेडिकल और डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया 'फास्ट ट्रैक' पर करवाएं। अधूरा काम आपका केस फंसा सकता है और पॉलिसी रिजेक्ट हो सकती है।

लेप्स (Lapsed) पॉलिसी रिवाइवल अभियान

नया ग्राहक ढूंढना मुश्किल है, (Cost of Acquisition) ज्यादा है, लेकिन पुराने रूठे हुए ग्राहक को मनाना आसान है।

कई बीमा कंपनियां (जैसे LIC, SBI Life, HDFC Life) JFM सीजन में 'स्पेशल रिवाइवल कैंपेन' चलाती हैं, जहां लेट फीस (Late Fee) में 20% से 30% तक की भारी छूट दी जाती है।

अपनी लिस्ट निकालें कि पिछले 3 साल में किन लोगों ने प्रीमियम भरना बंद कर दिया है।

उन्हें कॉल करें: "सर, आपकी पुरानी पॉलिसी में आपका गाढ़ा पसीना (Hard earned money) फंसा हुआ है। कंपनी अभी छूट दे रही है, थोड़े पैसे भरकर आप अपनी पुरानी कवरेज और बोनस फिर से शुरू कर सकते हैं। यह मौका हाथ से मत जाने दीजिये।"

यह प्रीमियम आपके JFM टारगेट में सीधा जुड़ता है और इसमें मेहनत कम लगती है।

डेली एक्शनेबल गणित (The Success Formula)

सपने देखने से MDRT (Million Dollar Round Table) पूरा नहीं होता, गणित से होता है।

अगर आपको मार्च तक 10 लाख का प्रीमियम (Weighted Premium) चाहिए और आपकी औसत टिकट साइज़ (Average Ticket Size) 50,000 रुपये है, तो आपको 20 पॉलिसी बेचनी हैं।

JBB Success Table: JFM 2026

नीचे दी गई सारणी (Table) को अपने वर्क-डे का हिस्सा बनाएं:

चरण गतिविधि अपेक्षित परिणाम
Prospecting रोज़ाना 10 नए लोगों को कॉल (Calls) 3 मीटिंग पक्की होंगी
Meeting रोज़ाना 3 फेस-टू-फेस मीटिंग 1 'हॉट' प्रोस्पेक्ट मिलेगा
Follow-up पुराने पेंडिंग ग्राहकों को 2 कॉल शंका समाधान
Closing हफ्ते में 6 हॉट प्रोस्पेक्ट्स से फाइनल बात 2 कन्फर्म सेल्स

Commission Calculator Example (आपकी कमाई)

बहुत से एजेंट बीच में ही थक जाते हैं क्योंकि उन्हें अपनी 'मेहनत का फल' साफ नहीं दिखता। आइये देखते हैं अगर आप ऊपर दिए गए फॉर्मूले का पालन करते हैं, तो JFM में आप कितना कमा सकते हैं:

विवरण संख्या/राशि
कुल पॉलिसी बेचीं 20 पॉलिसी
औसत प्रीमियम ₹50,000
कुल प्रीमियम संग्रह ₹10,00,000 (10 लाख)
अनुमानित कमीशन (Approx. 35%)* ₹3,50,000
बोनस/इनाम अतिरिक्त (Extra)
*नोट: कमीशन दरें प्लान और कंपनी के अनुसार 2% से 35% तक भिन्न हो सकती हैं। यह एक औसत उदाहरण है जिसमें फर्स्ट ईयर कमीशन और बोनस इंसेंटिव शामिल हो सकते हैं।

सोचिये! सिर्फ 3 महीने की मेहनत और ₹3.5 लाख की कमाई। क्या यह मोटिवेशन काफी नहीं है सुबह बिस्तर से जल्दी उठने के लिए?

डिजिटल अस्त्र: WhatsApp स्टेटस और ब्रॉडकास्ट लिस्ट का जादू

आज के दौर में अगर आप डिजिटल नहीं हैं, तो आप अदृश्य (Invisible) हैं। JFM में घर-घर जाने के साथ-साथ आपको अपने WhatsApp का भी सही इस्तेमाल करना होगा।

WhatsApp Status Strategy (जिज्ञासा जगाएं):

ज्यादातर एजेंट गलती यह करते हैं कि वे कंपनी के बोरिंग पोस्टर स्टेटस पर लगा देते हैं, जिसे कोई नहीं देखता। आपको 'Curiosity' (जिज्ञासा) जगानी है।

  • गलत स्टेटस: "Buy Jeevan Umang Policy Table No. 745."
  • सही स्टेटस: "सिर्फ ₹100 रोज बचाकर पाएं ₹50,000 साल भर की पेंशन... वो भी गारंटीड! जानना चाहते हैं कैसे? (Reply 'YES')"
  • इंगेजमेंट: जब लोग स्टेटस पर रिप्लाई करें, तो तुरंत चैट शुरू करें और मीटिंग फिक्स करें।

Broadcast List (ग्रुप न बनाएं):

कभी भी अपने क्लाइंट्स का 'WhatsApp Group' न बनाएं, लोग छोड़कर भाग जाते हैं। इसके बजाय 'Broadcast List' का उपयोग करें।

  • एक लिस्ट में 256 लोग आते हैं। ऐसी 4 लिस्ट बनाएं (1000 लोग)।
  • हफ्ते में सिर्फ 2 बार मैसेज भेजें।
  • मैसेज का प्रकार: सिर्फ पॉलिसी बेचने के मैसेज न भेजें। कभी-कभी 'फाइनेंशियल टिप्स', 'टैक्स सेविंग नियम' या 'Motivational Quotes' भेजें। इससे आपका रिश्ता (Relationship) मजबूत बना रहता है। जब आप वैल्यू देंगे, तभी ग्राहक आपकी पॉलिसी खरीदेगा।

रियल लाइफ केस स्टडी: सुरेश जी की 'रिव्यू' रणनीति

सूरत के एक अनुभवी एजेंट, श्री सुरेश भाई ने पिछले साल JFM में एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने नए ग्राहकों के पीछे भागना छोड़ दिया।

उन्होंने अपने 5 साल पुराने सभी ग्राहकों को फोन किया और कहा, "सर, आपने 5 साल पहले जो पॉलिसी ली थी, उसका मैं 'फ्री ऑडिट' (Policy Review) करना चाहता हूं। महंगाई बढ़ गई है, एक बार देख लेते हैं कि पुराना कवर आज के हिसाब से पर्याप्त है या नहीं।"

नतीजा: जब वे पुराने ग्राहकों से मिले, तो उन्होंने पाया कि कई ग्राहकों की आय (Income) बढ़ चुकी थी। सुरेश भाई ने इस तरह से कई पॉलिसियां बेचीं और अपनी आय में गजब की बढ़ोतरी पाई।

निष्कर्ष

साथियों, JFM का समय डरने का नहीं, बल्कि डटकर खेलने का है। 2026 आपके करियर का सबसे बेहतरीन साल हो सकता है, बस जरूरत है तो सही योजना (Planning), सही डिजिटल टूल्स और लगातार प्रयास (Consistency) की।

अपने पुराने डेटाबेस को खंगालें, WhatsApp का हथियार उठाएं, NRI संपर्कों को सक्रिय करें और सुरेश भाई की तरह 'स्मार्ट रिव्यू' तकनीक अपनाएं। याद रखें, हर 'ना' आपको एक 'हां' के करीब ले जाती है।

आपका JFM 2026 का टारगेट क्या है? क्या आप MDRT का लक्ष्य रख रहे हैं? हमें नीचे कमेंट (Comment) करके बताएं। हम आपकी सफलता की कामना करते हैं!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जी हाँ, अगर आप 31 मार्च 2026 से पहले प्रीमियम जमा कर देते हैं और पॉलिसी जारी हो जाती है, तो आप वित्त वर्ष 2025-26 के लिए धारा 80C के तहत छूट का दावा कर सकते हैं। चेक क्लियर होने की तारीख महत्वपूर्ण है।

NRI जब भारत आते हैं तो वे आसानी से पॉलिसी ले सकते हैं। उन्हें अपने पासपोर्ट की कॉपी, पते का प्रमाण और आय का प्रमाण (Income Proof) देना होता है। अगर वे विदेश में हैं, तो 'Mail Order Business' (वैकल्पिक चैनल) के जरिए भी पॉलिसी ले सकते हैं, लेकिन नियम थोड़े सख्त होते हैं।

कभी भी किसी कंपनी की बुराई न करें। ग्राहक को 'सॉल्वेंसी रेश्यो' (Solvency Ratio) और 'क्लेम सेटलमेंट रेश्यो' (CSR) के बारे में बताएं। उन्हें समझाएं कि IRDAI (बीमा विनियामक) सभी कंपनियों पर समान रूप से नजर रखता है और उनका पैसा हर जगह सुरक्षित है। मुख्य अंतर 'प्लान के फीचर्स' और 'सर्विस' में है—और सर्विस की गारंटी आप (एजेंट) हैं।

यह एक सख्त स्थिति है। विनम्रता से, लेकिन दृढ़ता से मना करें।

जवाब दें: "सर, बीमा कानून (Insurance Act, 1938 की धारा 41) के तहत रिबेट देना और लेना दोनों गैर-कानूनी हैं। मैं अपनी ईमानदारी और जीवन भर की सर्विस आपको दे रहा हूं, जो चंद रुपयों के डिस्काउंट से कहीं ज्यादा कीमती है। क्लेम के समय मैं ही आपके परिवार के साथ खड़ा रहूंगा, डिस्काउंट नहीं।"

यह ग्राहक की जरूरत पर निर्भर करता है। टैक्स बचाने और निवेश के लिए एंडोमेंट/यूलिप बेहतर हैं। शुद्ध सुरक्षा के लिए टर्म प्लान बेस्ट है। एक अच्छे एजेंट के रूप में, आपको 'काम्बो' (Combo) प्लान सुझाना चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों और बीमा जागरूकता के लिए है। बीमा आग्रह की विषयवस्तु है। टैक्स लाभ (Tax Benefits) वर्तमान आयकर कानूनों (Income Tax Act, 1961) के अधीन हैं और सरकार द्वारा समय-समय पर बदलाव के अधीन हैं। कमीशन की गणना केवल एक उदाहरण है और यह प्लान/कंपनी पर निर्भर करता है। कोई भी निवेश करने या पॉलिसी बेचने से पहले आधिकारिक पॉलिसी डॉक्यूमेंट और ब्रोशर को ध्यान से पढ़ें। Jeevan Bima Bazaar किसी भी वित्तीय नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं है।

12 जनवरी 2026

   

Tax Saving 2026: LIC के 3 बेस्ट प्लान जो 80C में टैक्स बचाएंगे और मोटा रिटर्न देंगे

LIC के 3 बेस्ट प्लान जो 80C में टैक्स बचाएंगे
Also available in English

2026 में स्मार्ट टैक्स प्लानिंग क्यों जरुरी है?

क्या आप भी मार्च के महीने में अपनी सैलरी स्लिप देखकर घबरा जाते हैं? टैक्स (Tax) कटना हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए एक बड़ा दर्द होता है। लेकिन, अगर सही समय पर सही जगह निवेश किया जाए, तो न केवल आप अपनी मेहनत की कमाई को टैक्स कटने से बचा सकते हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा चक्र भी तैयार कर सकते हैं।

साल 2026 आ चुका है, और महंगाई के साथ-साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में, केवल टैक्स बचाना ही काफी नहीं है; आपको एक ऐसा निवेश चाहिए जो टैक्स बचाने के साथ-साथ आपको मैच्योरिटी (Maturity) पर अच्छा रिटर्न भी दे। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) दशकों से हम भारतीयों का भरोसेमंद साथी रहा है।

आज के इस आर्टिकल में, हम LIC के उन 3 सबसे बेहतरीन प्लान्स (Best LIC Plans) के बारे में गहराई से जानेंगे, जो सेक्शन 80C के तहत आपको ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट दिला सकते हैं। चलिए, इस सफर की शुरुआत करते हैं।

LIC न्यू जीवन आनंद (Table 715): जिंदगी के साथ भी, बाद भी

जब भी LIC का नाम आता है, जुबान पर सबसे पहला नाम 'जीवन आनंद' का ही आता है। यह एक ऐसा प्लान है जो आपको दोहरी सुरक्षा देता है। यह प्लान न केवल आपको मैच्योरिटी पर एक मोटी रकम देता है, बल्कि मैच्योरिटी के बाद भी आपका जीवन बीमा (Risk Cover) मुफ्त में चलता रहता है।

यह प्लान उन लोगों के लिए एकदम सही है जो अपने बुढ़ापे के लिए पैसा जमा करना चाहते हैं और साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके न रहने पर परिवार को आर्थिक मदद मिले।

मुख्य विशेषताएं:

  • बोनस की सुविधा: यह एक पार्टिसिपेटिंग प्लान है, यानी LIC के मुनाफे में आपको बोनस मिलता है।
  • लाइफटाइम रिस्क कवर: पॉलिसी की अवधि खत्म होने और पैसा मिलने के बाद भी, अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु 100 वर्ष तक कभी भी होती है, तो नॉमिनी को सम एश्योर्ड (Sum Assured) की राशि दोबारा दी जाती है।
  • लोन और सरेंडर सुविधा (नया नियम): अब आप 1 वर्ष का पूरा प्रीमियम भरने और पॉलिसी का 1 वर्ष पूरा होने के बाद ही लोन ले सकते हैं या पॉलिसी सरेंडर कर सकते हैं। (पहले यह अवधि 2 वर्ष थी)।
पात्रता सारणी (Eligibility Table):
मापदंड (Parameter) विवरण (Details)
न्यूनतम आयु 18 वर्ष (पूर्ण)
अधिकतम आयु 50 वर्ष (निकटतम जन्मदिन)
पॉलिसी अवधि 15 से 35 वर्ष
न्यूनतम सम एश्योर्ड ₹2,00,000
अधिकतम सम एश्योर्ड कोई सीमा नहीं (आय पर निर्भर)
प्रीमियम भुगतान वार्षिक, अर्धवार्षिक, तिमाही, मासिक
ध्यान दें: जीवन आनंद में मैच्योरिटी और डेथ बेनिफिट दोनों ही इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(10D) के तहत टैक्स-फ्री हैं (शर्तों के अधीन)।

LIC जीवन उत्सव (Table 771): जीवन भर 10% की गारंटी

अगर आप शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से डरते हैं और 'फिक्स रिटर्न' (Guaranteed Return) चाहते हैं, तो LIC का नया प्लान 'जीवन उत्सव' (Table 771) आपके लिए गेम-चेंजर है। यह एक Non-Linked, Non-Participating प्लान है, यानी इसमें बोनस का इंतजार नहीं करना है, सब कुछ पहले दिन से तय (Guaranteed) होता है।

इस प्लान की सबसे बड़ी ताकत है "10% लाइफटाइम इनकम"। प्रीमियम भरने की अवधि खत्म होने के कुछ साल बाद से आपको हर साल सम एश्योर्ड का 10% मिलना शुरू हो जाता है, जो 100 साल की उम्र तक मिलता रहता है।

मुख्य विशेषताएं:

  • गारंटीड एडिशन्स (Guaranteed Additions): प्रीमियम भुगतान अवधि (PPT) के दौरान, हर साल आपके खाते में ₹40 प्रति हजार सम एश्योर्ड जुड़ते रहेंगे 1।
  • दो विकल्प (Options):
    • रेगुलर इनकम बेनिफिट: हर साल 10% कैश अपने बैंक खाते में लें ।
    • फ्लेक्सी इनकम बेनिफिट: अपना 10% पैसा LIC के पास जमा रहने दें। LIC इस पर आपको 5.5% सालाना चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding Interest) देगी। आप जब चाहें अपनी जमा राशि (75% तक) निकाल सकते हैं ।
  • लाइफटाइम सुरक्षा: इनकम के साथ-साथ जीवन भर रिस्क कवर भी चलता रहता है।
पात्रता सारणी (Eligibility Table):
मापदंड (Parameter) विवरण (Details)
न्यूनतम आयु 90 दिन (16 वर्ष की टर्म के लिए) से लेकर 8 वर्ष (5 वर्ष की टर्म के लिए)
अधिकतम आयु 65 वर्ष (निकटतम जन्मदिन)
प्रीमियम भुगतान अवधि 5 से 16 वर्ष
न्यूनतम सम एश्योर्ड ₹5,00,000
इनकम शुरू होने का समय 5 से 8 साल की PPT के लिए: 11वें साल के अंत में।
9 से 16 साल की PPT के लिए: (PPT + 2 साल) के बाद। (उदा. 10 साल प्रीमियम दिया, तो 13वें साल के अंत में पैसा मिलेगा) ।
उदाहरण: अगर आप 10 साल प्रीमियम भरते हैं, तो आपको 2 साल इंतजार करना होगा (Deferment Period) और 13वें साल से जीवन भर पैसा मिलेगा। वहीँ 5 साल प्रीमियम भरने पर इंतजार 5 साल का होगा।

LIC जीवन लक्ष्य (Table 733): परिवार के सपनों का रक्षक

इसे आम भाषा में "कन्यादान पॉलिसी" के रूप में भी जाना जाता है, हालांकि यह बेटे और बेटी दोनों के लिए है। यह प्लान उन माता-पिता के लिए सबसे बेस्ट है जो अपने बच्चों की शिक्षा या शादी के लिए फंड जमा करना चाहते हैं।

इस प्लान का सबसे बड़ा जादुई फीचर है - पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर प्रीमियम का रुक जाना और इनकम शुरू हो जाना। अगर पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक (पिता/अभिभावक) की मृत्यु हो जाती है, तो:

  • प्रीमियम माफ़: परिवार को आगे कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ेगा।
  • सालाना इनकम: परिवार को हर साल बच्चों के खर्च के लिए सम एश्योर्ड का 10% मिलेगा (पॉलिसी मैच्योरिटी से एक साल पहले तक) ।
  • मैच्योरिटी पर बड़ी रकम: अंत में पॉलिसी खत्म होने पर सम एश्योर्ड का 110% + बोनस + फाइनल एडिशनल बोनस (यदि कोई हो) परिवार को दिया जाएगा ।
पात्रता सारणी (Eligibility Table):
मापदंड (Parameter) विवरण (Details)
न्यूनतम आयु 18 वर्ष (पूर्ण)
अधिकतम आयु 50 वर्ष (निकटतम जन्मदिन)
पॉलिसी अवधि 13 से 25 वर्ष
प्रीमियम भुगतान अवधि पॉलिसी टर्म से 3 साल कम (Term - 3)
न्यूनतम सम एश्योर्ड ₹2,00,000
अधिकतम सम एश्योर्ड कोई सीमा नहीं (आय पर निर्भर)
ध्यान दें: यह प्लान सुरक्षा और बचत का बेहतरीन कॉम्बिनेशन है, जहाँ आपके न रहने पर भी आपके द्वारा देखा गया सपना (जैसे बच्चे की पढ़ाई) पैसों की कमी से नहीं रुकता।

LIC राइडर्स: कम खर्च में डबल सुरक्षा कैसे पाएं?

अक्सर लोग पॉलिसी लेते समय सिर्फ बेसिक प्लान लेते हैं और 'राइडर्स' (Riders) को नजरअंदाज कर देते हैं। यह एक बड़ी गलती है। राइडर्स पिज्जा पर "एक्स्ट्रा चीज" की तरह हैं - थोड़ा सा खर्च, लेकिन स्वाद (सुरक्षा) दोगुना।

टैक्स सेविंग के साथ-साथ अपनी प्रोटेक्शन बढ़ाने के लिए आपको ये दो राइडर्स जरूर देखने चाहिए:

1. एक्सीडेंटल डेथ एंड डिसेबिलिटी बेनिफिट राइडर (ADDB):

जीवन अनिश्चित है। अगर दुर्घटना के कारण मृत्यु होती है, तो इस राइडर के तहत नॉमिनी को अतिरिक्त सम एश्योर्ड मिलता है। यानी अगर 5 लाख की पॉलिसी है, तो नॉर्मल डेथ पर 5 लाख, लेकिन एक्सीडेंटल डेथ पर 10 लाख + बोनस मिलेगा। साथ ही, अगर एक्सीडेंट से विकलांगता (Disability) आती है, तो 10 साल तक मासिक किश्तें मिलती हैं। इसका प्रीमियम बहुत मामूली होता है।

2. टर्म एश्योरेंस राइडर (Term Rider):

यह आपके जीवन बीमा का कवर बढ़ाने का सबसे सस्ता तरीका है। अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु होती है, तो टर्म राइडर की राशि भी डेथ बेनिफिट में जुड़ जाती है। यह कम प्रीमियम में हाई रिस्क कवर पाने का स्मार्ट तरीका है।

प्रो टिप: पॉलिसी लेते समय अपने एजेंट से इन राइडर्स के बारे में जरुर पूछें। यह आपके प्रीमियम को थोड़ा बढ़ाएंगे, लेकिन क्लेम के समय बहुत बड़ी राहत देंगे।

केस स्टडी: रमेश की टैक्स प्लानिंग और रिटर्न (Detailed Calculation)

मान लीजिए रमेश, जिनकी उम्र 30 वर्ष है, एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर हैं। वह टैक्स बचाने के लिए और रिटायरमेंट फंड के लिए LIC जीवन आनंद (915) प्लान लेते हैं।

  • सम एश्योर्ड: ₹5,00,000
  • पॉलिसी टर्म: 25 वर्ष
  • वार्षिक प्रीमियम (टैक्स सहित): लगभग ₹22,500 (पहले साल थोड़ा ज्यादा, फिर कम)
रिटर्न और लाभ का गणित (Calculation Table):
चरण रमेश द्वारा जमा/प्राप्त राशि विवरण
कुल जमा प्रीमियम ₹5,50,000 (लगभग) 25 वर्षों में थोड़ा-थोड़ा करके जमा हुआ।
मैच्योरिटी (55 की उम्र में) ₹13,00,000 (अनुमानित) सम एश्योर्ड + बोनस + फाइनल एडिशनल बोनस।
टैक्स लाभ (80C) ₹6,75,000 (अनुमानित) यदि रमेश 30% टैक्स स्लैब में हैं, तो 25 साल में इतनी टैक्स बचत।
शुद्ध लाभ मैच्योरिटी + टैक्स बचत रमेश का पैसा सुरक्षित भी रहा और बढ़ा भी।
लाइफटाइम कवर ₹5,00,000 मैच्योरिटी लेने के बाद भी, 55 की उम्र के बाद कभी भी मृत्यु होने पर परिवार को यह राशि अलग से मिलेगी।
नोट: ऊपर दिए गए बोनस के आंकड़े वर्तमान दरों पर आधारित अनुमानित (Projected) हैं। वास्तविक रिटर्न LIC द्वारा घोषित भविष्य के बोनस पर निर्भर करेगा।

LIC पॉलिसी लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज

पॉलिसी लेते समय भागदौड़ से बचने के लिए, नीचे दिए गए दस्तावेजों को पहले से तैयार रखें। यह चेकलिस्ट (Checklist) आपके काम को आसान बना देगी:

  • पहचान का प्रमाण (Identity Proof): आधार कार्ड, पैन कार्ड, या पासपोर्ट।
  • पते का प्रमाण (Address Proof): आधार कार्ड, बिजली बिल, या ड्राइविंग लाइसेंस।
  • जन्म का प्रमाण (Age Proof): स्कूल सर्टिफिकेट (10th मार्कशीट), जन्म प्रमाण पत्र, या पैन कार्ड।
  • आय का प्रमाण (Income Proof): अगर सम एश्योर्ड ज्यादा है तो ITR फाइल या सैलरी स्लिप (Salary Slip) की जरुरत पड़ सकती है।
  • तस्वीर: 2 पासपोर्ट साइज कलर फोटो।
  • बैंक विवरण: कैंसिल चेक (NEFT द्वारा मैच्योरिटी पाने के लिए)।

मेडिकल चेकअप: आपकी उम्र और सम एश्योर्ड की राशि के आधार पर, कभी-कभी LIC मेडिकल टेस्ट की मांग कर सकती है, जिसका खर्च आमतौर पर LIC उठाती है।

निष्कर्ष

2026 में टैक्स बचाना जरुरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरुरी है अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करना। LIC के ये तीनों प्लान – जीवन आनंद, जीवन उत्सव और जीवन लक्ष्य – अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं।

  • रिटायरमेंट और लाइफटाइम कवर के लिए -> जीवन आनंद चुनें।
  • गारंटीड इनकम के लिए -> जीवन उत्सव चुनें।
  • बच्चों के भविष्य के लिए -> जीवन लक्ष्य चुनें।

देर न करें, क्योंकि आपकी उम्र बढ़ने के साथ प्रीमियम भी बढ़ता है। आज ही निर्णय लें!

अगर आप कंफ्यूज हैं कि आपके लिए कौन सा प्लान सही है, तो हमें कमेंट करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हाँ, इनकम टैक्स की धारा 10(10D) के तहत, अगर आपका वार्षिक प्रीमियम सम एश्योर्ड के 10% से ज्यादा नहीं है, तो मिलने वाली मैच्योरिटी राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है।

बिल्कुल! आप अपनी आय और जरुरत के हिसाब से जितनी चाहें उतनी पॉलिसी ले सकते हैं। इसे 'ह्यूमन लाइफ वैल्यू' (HLV) के आधार पर तय किया जाता है।

अगर आपने कम से कम 2 साल (कुछ प्लान में 3 साल) प्रीमियम भरा है, तो आपकी पॉलिसी 'पेड-अप' (Paid-up) हो जाती है। आपको पैसा तो मिलेगा, लेकिन कम होकर। बेहतर यही है कि पॉलिसी को लेप्स न होने दें।

अगर आपको सिर्फ सुरक्षा चाहिए और पैसा वापस नहीं चाहिए, तो टर्म प्लान लें। लेकिन अगर आप 'सुरक्षा + बचत' (Tax Saving + Return) दोनों चाहते हैं, तो ऊपर बताए गए प्लान (आनंद, उत्सव, लक्ष्य) बेहतर हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। बीमा एक आग्रह की विषयवस्तु है। निवेश करने से पहले पॉलिसी ब्रशर पढ़ें और अपने वित्तीय सलाहकार या LIC एजेंट से परामर्श अवश्य लें। पिछले प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं हैं।

10 जनवरी 2026

   

क्लेम रिजेक्शन क्यों होता है? ‘Medical Necessity’ और आपके कानूनी अधिकार

Medical Necessity और आपके कानूनी अधिकार
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बीमारी बताकर नहीं आती, और जब आती है तो हम सबसे पहले डॉक्टर की सलाह मानते हैं। अगर डॉक्टर कहते हैं, "मरीज को तुरंत एडमिट करना पड़ेगा," तो हम एक पल भी नहीं सोचते। लेकिन सोचिए, इलाज के बाद जब आप इंश्योरेंस कंपनी को बिल भेजते हैं, और वहां से जवाब आता है— "क्लेम रिजेक्टेड: मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं थी, घर पर इलाज हो सकता था।"

यह सुनना किसी सदमे से कम नहीं होता। लाखों का प्रीमियम भरने के बाद भी अगर अपनी जेब से इलाज करवाना पड़े, तो पॉलिसी का क्या फायदा?

आज के इस आर्टिकल में हम लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े एक सबसे पेचीदा शब्द 'Medically Necessary Hospitalization' (अस्पताल में भर्ती होने की चिकित्सीय आवश्यकता) को डिकोड करेंगे। हम एक सत्यापित कोर्ट केस के जरिए समझेंगे कि कानून आपके साथ कैसे खड़ा है और एक एजेंट या पॉलिसी होल्डर के रूप में आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

'Medically Necessary Hospitalization' आखिर है क्या?

साधारण भाषा में समझें तो इसका मतलब है—क्या मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि उसका इलाज घर पर न होकर सिर्फ अस्पताल में ही हो सकता था?

IRDAI (भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण) की परिभाषा के अनुसार, कोई भी इलाज 'Medically Necessary' तब माना जाता है जब:

  • वह डॉक्टर द्वारा लिखित में (Prescribed) हो।
  • इलाज का स्तर (Level of Care) सुरक्षित और उचित हो।
  • वह इलाज भारत या अंतरराष्ट्रीय मेडिकल मानकों (Standards) के अनुरूप हो।
  • वह केवल मरीज की सुविधा या आराम (जैसे पर्सनल नर्स या लग्जरी रूम) के लिए न हो।

नोट: IRDAI की विस्तृत परिभाषा वाली PDF फाइल हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी जाएगी, जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं।

'डे-केयर ट्रीटमेंट' और 'घर पर इलाज' में अंतर

अक्सर लोग सोचते हैं कि क्लेम लेने के लिए अस्पताल में कम से कम 24 घंटे भर्ती रहना अनिवार्य है। लेकिन मेडिकल साइंस की तरक्की और इंश्योरेंस के नियमों ने अब इसे बदल दिया है। 'Medically Necessary' को ठीक से समझने के लिए इन दो शर्तों को जानना ज़रूरी है:

  • डे-केयर ट्रीटमेंट (Day Care Treatment):

    टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ गई है कि जो सर्जरी या इलाज पहले 2-3 दिन लेते थे, अब वो कुछ घंटों में हो जाते हैं। जैसे मोतियाबिंद (Cataract), कीमोथेरेपी, या डायलिसिस।

    नियम: इसे 'भर्ती' ही माना जाता है, भले ही आप 24 घंटे से कम समय के लिए अस्पताल में हों। लेकिन, यह इलाज पॉलिसी में लिस्टेड होना चाहिए।

  • डोमिसिलीरी हॉस्पिटलाइजेशन

    इसे आम भाषा में "घर पर इलाज" कहते हैं। लेकिन सावधान रहें! यह आपकी 'मर्जी' (Choice) से नहीं, बल्कि 'मजबूरी' (Condition) में मिलता है।

    नियम: इसका क्लेम तभी मिलता है जब मरीज की हालत इतनी गंभीर हो कि उसे अस्पताल नहीं ले जाया जा सकता, या अस्पताल में कोई बेड खाली न हो। सिर्फ इसलिए कि "मुझे अस्पताल पसंद नहीं है," आप इसका क्लेम नहीं ले सकते।

एक नज़र में अंतर समझें:

आधार डे-केयर ट्रीटमेंट डोमिसिलीरी हॉस्पिटलाइजेशन
स्थान अस्पताल या क्लिनिक में होता है। मरीज के घर पर होता है।
समय 24 घंटे से कम। आमतौर पर 3 दिन से अधिक का इलाज।
वजह तकनीकी उन्नति के कारण इलाज जल्दी हो जाता है। मरीज की गंभीर हालत या अस्पताल में बेड की कमी।
उदाहरण मोतियाबिंद सर्जरी, रेडियोथेरेपी, डायलिसिस। लकवा (Paralysis), गंभीर अस्थमा, या कोमा जैसी स्थिति (यदि डॉक्टर घर पर सेटअप लगाए)।
क्लेम की शर्त इलाज 'डे-केयर लिस्ट' में होना चाहिए। डॉक्टर का प्रमाण पत्र ज़रूरी है कि "अस्पताल ले जाना संभव नहीं था।"

समस्या कहाँ आती है?

अक्सर विवाद तब होता है जब आपके डॉक्टर को लगता है कि "भर्ती करना ज़रूरी है," लेकिन इंश्योरेंस कंपनी के डॉक्टर्स की टीम को लगता है कि "यह इलाज तो गोलियों से घर पर भी हो सकता था।" इसे "Active Line of Treatment" का मुद्दा कहा जाता है।

कंपनियां अक्सर यह कहकर क्लेम रोक देती हैं कि आप सिर्फ 'ऑब्जर्वेशन' (निगरानी) या 'आइसोलेशन' के लिए भर्ती हुए थे। लेकिन क्या कंपनी का फैसला अंतिम होता है? जवाब है— नहीं!

केस स्टडी: जब कोर्ट ने कहा— "इलाज का फैसला डॉक्टर करेगा, बीमा कंपनी नहीं"

आइए, एक हालिया और महत्वपूर्ण केस पर नज़र डालते हैं जो हर पॉलिसीहोल्डर के लिए एक जीत की तरह है। यह जानकारी सत्यापित शोध पर आधारित है।

मामला: अजय नागर और नीतू नागर बनाम स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस।

घटना: जनवरी 2022 (कोविड-19 की तीसरी लहर)।

क्या हुआ था: नीतू नागर को तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ हुई। डॉक्टर ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी। इलाज हुआ, मरीज ठीक होकर घर आ गया। लेकिन जब क्लेम फाइल किया गया, तो स्टार हेल्थ (Star Health) ने यह कहकर क्लेम खारिज कर दिया कि मरीज के लक्षण "हल्के" (Mild) थे और उनका इलाज घर पर आइसोलेशन में किया जा सकता था।

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (दिसंबर 2025): जिला उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में पॉलिसीहोल्डर के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:

"बीमा कंपनी एसी कमरे में बैठकर यह तय नहीं कर सकती कि मरीज का इलाज कैसे होना चाहिए। मरीज को भर्ती करना है या नहीं, यह फैसला केवल इलाज कर रहे डॉक्टर का ही सर्वोपरि माना जाएगा।"

नतीजा: कोर्ट ने स्टार हेल्थ को सेवा में कमी का दोषी पाया और आदेश दिया कि वे:

  • ₹50,000 का हर्जाना दें।
  • इस राशि पर 6% वार्षिक ब्याज दें।
  • ₹2,000 कानूनी खर्च (Litigation Cost) के रूप में भुगतान करें।

यह केस साबित करता है कि अगर आपके पास सही कागजात हैं और डॉक्टर की सलाह पक्की है, तो इंश्योरेंस कंपनी मनमानी नहीं कर सकती।

बीमा लोकपाल (Ombudsman): आपकी मदद के लिए एक मज़बूत साथी

अगर कंपनी आपकी बात न सुने, तो आपको सीधे कोर्ट जाने की भी ज़रूरत नहीं है। आप बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) के पास जा सकते हैं। यह प्रक्रिया बहुत सरल और निशुल्क है।

नई अपडेट (नवंबर 2023 के बाद): पहले लोकपाल केवल 30 लाख रुपये तक के क्लेम सुनता था, लेकिन अब यह सीमा बढ़ा दी गई है।

विवरण पुरानी सीमा नई सीमा (वर्तमान)
अधिकतम क्लेम राशि ₹30 लाख ₹50 लाख
मानसिक पीड़ा का मुआवजा कम था ₹1 लाख तक
परिणामी हानि कम था ₹20 लाख तक
ध्यान दें: यह 50 लाख की सीमा में आपके क्लेम की राशि + मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा शामिल है। अगर आपका मामला 50 लाख से ऊपर का है, तो आपको कंज्यूमर कोर्ट या अन्य कानूनी रास्ते अपनाने होंगे।

नॉन-मेडिकल खर्च (Non-Medical Expenses)

अक्सर ऐसा होता है कि कंपनी मान लेती है कि आपका हॉस्पिटलाइजेशन "Medically Necessary" (ज़रूरी) था, क्लेम पास भी हो जाता है, लेकिन जब बैंक में पैसे आते हैं, तो वो आपके बिल से 10-20% कम होते हैं।

गुस्सा आना लाज़िमी है, लेकिन इसका कारण छिपा होता है 'Non-Medical Expenses' (गैर-चिकित्सकीय खर्च) की लिस्ट में।

ये 'नॉन-मेडिकल खर्च' क्या हैं- इंश्योरेंस कंपनियां मानती हैं कि वे आपके 'इलाज' का पैसा देंगी, आपकी 'सुविधा' या 'साफ-सफाई' के सामान का नहीं। इसे Consumables भी कहा जाता है। इसमें आम तौर पर शामिल होते हैं:

  • ग्लव्स, मास्क, और पीपीई किट (PPE Kits)।
  • सैनिटाइजर, साबुन, या टिशू पेपर।
  • हॉउसकीपिंग चार्ज या रजिस्ट्रेशन फीस।
  • डाइपर, सिरिंज, या डिस्पोजेबल रेज़र।

हालांकि, IRDAI के नए दिशा-निर्देशों (2024-25) के बाद कई कंपनियों ने अब इन खर्चों को कवर करना शुरू कर दिया है, लेकिन यह तभी मिलता है जब आपने अपनी पॉलिसी में 'Consumables Rider' या 'Care 360' जैसा कोई ऐड-ऑन (Add-on) लिया हो।

ध्यान दें: अगर आपकी पॉलिसी पुरानी है (3-4 साल पहले की), तो हो सकता है कि उसमें ये खर्च कवर न हों। इसलिए क्लेम फाइल करते समय अपनी जेब से 5-10 हज़ार रुपये भरने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें, भले ही आपका क्लेम 100% पास हो जाए।

अब आपको क्या करना चाहिए?

एक जागरूक पॉलिसीहोल्डर या स्मार्ट एजेंट के तौर पर, आपको क्लेम रिजेक्शन से बचने के लिए डिस्चार्ज के समय ही सतर्क रहना होगा। यहाँ कुछ ज़रूरी टिप्स हैं:

फ्री डाउनलोड: IRDAI की आधिकारिक परिभाषा

सिर्फ सुनी-सुनाई बातों पर निर्भर न रहें। जब आप इंश्योरेंस कंपनी या लोकपाल (Ombudsman) के सामने अपना पक्ष रखें, तो आपके हाथ में लिखित सबूत होना चाहिए।

हमने आपके लिए IRDAI की वेबसाइट से 'Medically Necessary' की आधिकारिक परिभाषा की PDF फाइल यहाँ उपलब्ध कराई है। इसे डाउनलोड करें और अपने पास सुरक्षित रखें। भविष्य में क्लेम विवाद के समय यह दस्तावेज आपके लिए 'ब्रह्मास्त्र' का काम करेगा।

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डिस्चार्ज समरी को ध्यान से पढ़ें

यह सिर्फ दवाइयों की पर्ची नहीं, बल्कि आपका सबसे बड़ा कानूनी सबूत है। अपने डॉक्टर से निवेदन करें कि वे डिस्चार्ज समरी में यह साफ़-साफ़ लिखें कि "भर्ती करना क्यों अनिवार्य था।"

  • गलत तरीका: "मरीज को बुखार था, एडमिट किया गया।"
  • सही तरीका: "मरीज को 103 डिग्री बुखार था जो ओरल दवाइयों से कम नहीं हो रहा था, साथ ही ऑक्सीजन लेवल गिर रहा था, इसलिए IV फ्लूड और निरंतर निगरानी के लिए भर्ती करना चिकित्सकीय रूप से आवश्यक (Medically Necessary) था।"

कागजी कार्रवाई पूरी रखें

डॉक्टर की पहली पर्ची (Prescription) जिसमें 'Admission Advised' लिखा हो, उसे कभी न खोएं।

हार न मानें

अगर कंपनी क्लेम रिजेक्ट करे, तो उसे अंतिम फैसला न समझें। पहले कंपनी के 'Grievance Redressal Officer' को लिखें। अगर 30 दिनों में जवाब न मिले या आप संतुष्ट न हों, तो बीमा लोकपाल (Ombudsman) का दरवाजा खटखटाएं।

स्मार्ट चेकलिस्ट

अस्पताल छोड़ते समय (Discharge) ये 5 कागज़ जरूर चेक करें, जल्दबाजी में डिस्चार्ज न लें। काउंटर छोड़ने से पहले अपनी फाइल में ये चीज़ें टिक करें:

  • डिस्चार्ज समरी (Discharge Summary): सबसे महत्वपूर्ण! चेक करें कि इसमें "Admission Reason" (भर्ती का कारण) साफ लिखा हो।
  • फाइनल बिल (Detailed Breakup): सिर्फ कुल रकम नहीं, बल्कि हर सुई और दवा का अलग-अलग हिसाब (Breakup) मांगें।
  • लैब रिपोर्ट्स (Lab Reports): एक्स-रे फिल्मों और एमआरआई (MRI) की ओरिजिनल रिपोर्ट और फिल्में साथ लें।
  • फार्मेसी बिल: अस्पताल के अंदर से खरीदी गई दवाइयों के पक्के बिल, जिन पर डॉक्टर की पर्ची (Prescription) मैच होती हो।
  • पेमेंट रसीद: अगर आपने कैशलेस नहीं, बल्कि रिइम्बर्समेंट (Reimbursement) क्लेम करना है, तो 'Paid Stamp' लगी हुई रसीद लेना न भूलें।

निष्कर्ष

इंश्योरेंस पॉलिसी सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि मुसीबत के समय आपका सुरक्षा कवच है। 'Medically Necessary' जैसे शब्दों को कंपनी को अपने खिलाफ इस्तेमाल न करने दें। जैसा कि हमने अजय नागर जी के केस में देखा, कानून उपभोक्ता के साथ है, बशर्ते आप अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों।

अगर आप एक एजेंट हैं, तो अपने ग्राहकों को यह जानकारी जरूर दें। इससे न सिर्फ उनका क्लेम पास होगा, बल्कि आप पर उनका भरोसा भी बढ़ेगा।

अगला कदम: क्या आप चाहते हैं कि मैं आपको "बीमा लोकपाल में शिकायत दर्ज करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका" समझाऊं? नीचे कमेंट करके बताएं!

डॉक्टर की सलाह पर अस्पताल में भर्ती होने से क्लेम मिलने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है, लेकिन यह अपने-आप में क्लेम की गारंटी नहीं होती।

बीमा कंपनी आमतौर पर यह देखती है कि भर्ती के दौरान Active Treatment हुआ है या नहीं। अगर मरीज को केवल आराम, निगरानी (Observation) या सामान्य टेस्ट के लिए एडमिट किया गया है, और इलाज सक्रिय रूप से नहीं चला, तो क्लेम पर आपत्ति हो सकती है।

इसलिए डिस्चार्ज समरी में भर्ती होने का स्पष्ट और ठोस मेडिकल कारण, इलाज की प्रक्रिया और दिए गए उपचार का उल्लेख होना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

नहीं, बीमा लोकपाल अब केवल 50 लाख रुपये तक के मामलों (मुआवजे सहित) को सुन सकता है। इससे बड़े क्लेम के लिए आपको उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) जाना होगा।

क्लेम रिजेक्ट होने के बाद आपके पास शिकायत करने के लिए एक निश्चित समय सीमा (आमतौर पर 1 साल लोकपाल के लिए) होती है। अपने पॉलिसी दस्तावेजों में दिए गए समय को चेक करें या किसी एक्सपर्ट से सलाह लें।

इसकी परिभाषा IRDAI द्वारा तय की गई है और यह मेडिकल साइंस के मानकों पर आधारित होती है। कोई भी इंश्योरेंस कंपनी अपनी मर्जी से इसे बदल नहीं सकती।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह कानूनी या पेशेवर वित्तीय सलाह नहीं है। किसी भी कानूनी कार्यवाही या क्लेम फाइलिंग के लिए, कृपया अपनी पॉलिसी के नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें और किसी प्रमाणित बीमा सलाहकार या वकील से संपर्क करें। YMYL (Your Money Your Life) दिशानिर्देशों के तहत, हम सटीक जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन नियमों में बदलाव संभव है।

09 जनवरी 2026

   

नौकरी छूटने पर हेल्थ इंश्योरेंस कैसे सुरक्षित रखें?

नौकरी छूटने पर हेल्थ इंश्योरेंस कैसे सुरक्षित रखें
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नौकरी छूटना किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे अनिश्चित दौर हो सकता है। आय का स्रोत अचानक रुक जाना, भविष्य को लेकर असमंजस और परिवार की ज़िम्मेदारियाँ—ये सभी बातें मानसिक दबाव बढ़ा देती हैं। लेकिन इस पूरे तनाव के बीच एक ऐसा विषय भी होता है, जिस पर ज़्यादातर लोग समय रहते ध्यान नहीं देते—हेल्थ इंश्योरेंस

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि कंपनी का दिया हुआ हेल्थ इंश्योरेंस कुछ समय तक चलता रहेगा या नई नौकरी मिलते ही फिर से सुरक्षा मिल जाएगी। लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस के मामले में यह सोच कई बार भारी पड़ जाती है। क्योंकि बीमारी या दुर्घटना कभी समय देखकर नहीं आती, और अगर उस समय बीमा कवरेज नहीं हुआ, तो इलाज का खर्च सीधे व्यक्ति की जेब पर असर डालता है।

इस लेख में हम भावनात्मक दिलासे नहीं, बल्कि IRDAI द्वारा तय किए गए नियमों, समय-सीमाओं और व्यावहारिक विकल्पों के आधार पर यह समझेंगे कि नौकरी छूटने की स्थिति में हेल्थ इंश्योरेंस को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।

कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस क्यों सबसे बड़ा जोखिम बन जाता है?

कॉर्पोरेट नौकरी में मिलने वाला हेल्थ इंश्योरेंस आमतौर पर ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होता है। यह पॉलिसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि कंपनी की होती है और नौकरी से सीधे जुड़ी रहती है। जब तक व्यक्ति कंपनी में कार्यरत रहता है, तब तक यह कवरेज उसे और उसके परिवार को सुरक्षा देता है।

जैसे ही नौकरी समाप्त होती है, यह कवरेज भी समाप्त हो सकता है। अधिकतर मामलों में ग्रुप पॉलिसी Last Working Day तक ही वैध रहती है। नोटिस पीरियड पूरा होना या सैलरी सेटलमेंट इस कवरेज को अपने-आप आगे नहीं बढ़ाता। यही वह बिंदु है, जहाँ सबसे बड़ा जोखिम पैदा होता है।

अगर इसी समय कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तो व्यक्ति बिना किसी बीमा सुरक्षा के खड़ा हो सकता है और इलाज का पूरा खर्च उसे खुद उठाना पड़ सकता है।

आम गलत धारणाएँ जो नुकसान का कारण बनती हैं

नौकरी छूटने और हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर कुछ गलतफहमियाँ बहुत आम हैं। पहली यह कि कंपनी कुछ समय तक बीमा चालू रखेगी। कुछ विशेष मामलों में ऐसा हो सकता है, लेकिन यह कोई सामान्य नियम नहीं है।

दूसरी गलत धारणा यह है कि भारत में कोई ऐसा कानून होगा जो नौकरी छूटने के बाद भी बीमा सुरक्षा सुनिश्चित करता होगा। कई लोग दूसरे देशों के उदाहरण सुनकर ऐसा मान लेते हैं, लेकिन भारत में व्यवस्था अलग है। यहाँ बीमा नियामक ने अधिकार दिए हैं, लेकिन उन्हें सही समय पर इस्तेमाल करना ज़रूरी होता है।

तीसरी गलत धारणा यह होती है कि नई नौकरी मिलते ही सब ठीक हो जाएगा। नई नौकरी में नया बीमा कब लागू होगा और उसकी शर्तें क्या होंगी—यह पहले से तय नहीं होता।

सोच में बदलाव क्यों ज़रूरी है?

कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस किराए के मकान जैसा होता है। नौकरी रही तो मकान रहा, नौकरी गई तो मकान भी छूट सकता है। इसके विपरीत, पर्सनल हेल्थ इंश्योरेंस अपने घर जैसा होता है, जो नौकरी बदलने या छूटने से प्रभावित नहीं होता।

इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस को केवल नौकरी का लाभ नहीं, बल्कि परिवार की बुनियादी सुरक्षा के रूप में देखना ज़रूरी है।

IRDAI के 2020 पोर्टेबिलिटी नियम क्या कहते हैं?

बीमा नियामक IRDAI ने 2020 में हेल्थ इंश्योरेंस की पोर्टेबिलिटी और माइग्रेशन से जुड़े स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पॉलिसीधारक नौकरी छूटने जैसी स्थिति में पूरी तरह असुरक्षित न हो जाए।

पोर्टेबिलिटी का अर्थ

पोर्टेबिलिटी का मतलब है अपनी मौजूदा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को किसी दूसरी बीमा कंपनी की इंडिविजुअल या फैमिली फ्लोटर पॉलिसी में स्थानांतरित करना।

ग्रुप से इंडिविजुअल पॉलिसी में माइग्रेशन

IRDAI के नियमों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति ग्रुप हेल्थ पॉलिसी से बाहर निकलता है—जैसे नौकरी छूटने पर—तो उसे इंडिविजुअल या फैमिली फ्लोटर पॉलिसी में माइग्रेशन का विकल्प दिया जाना चाहिए।

पोर्टेबिलिटी की समय-सीमा

यह सबसे महत्वपूर्ण जानकारी है, जिसे अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

  • IRDAI के दिशानिर्देशों के अनुसार, पॉलिसीधारक को अपनी मौजूदा पॉलिसी की रिन्यूअल डेट से कम से कम 30 दिन पहले पोर्टेबिलिटी के लिए आवेदन करना चाहिए। नौकरी छूटने के मामले में, अपने HR या बीमा कंपनी को अपने Last Working Day से पहले ही सूचित करना सबसे सुरक्षित है।
  • कुछ मामलों में बीमा कंपनी 30 दिन से कम समय में भी आवेदन स्वीकार कर सकती है, लेकिन यह पूरी तरह बीमाकर्ता के विवेक पर निर्भर करता है।
  • अंडरराइटिंग की स्थिति में बीमा कंपनी को 15 दिनों के भीतर अपना निर्णय पॉलिसीधारक को बताना होता है।

समय पर आवेदन न करने की स्थिति में पोर्टेबिलिटी का लाभ छूट सकता है।

वेटिंग पीरियड और अंडरराइटिंग से जुड़े नियम

IRDAI के नियम यह भी स्पष्ट करते हैं कि:

  • जो वेटिंग पीरियड पहले ही पूरा हो चुका है, उसे नई पॉलिसी में दोबारा नहीं लगाया जाना चाहिए।
  • केवल बचा हुआ (unexpired) वेटिंग पीरियड ही लागू किया जा सकता है।
  • ग्रुप से इंडिविजुअल पॉलिसी में माइग्रेशन के मामलों में अंडरराइटिंग की जा सकती है।

पोर्टेबिलिटी के लिए ज़रूरी दस्तावेज

पोर्टेबिलिटी प्रक्रिया शुरू करने से पहले ये दस्तावेज तैयार रखना उपयोगी होता है:

  • पोर्टेबिलिटी रिक्वेस्ट फॉर्म
  • मौजूदा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की कॉपी
  • पिछले वर्षों का पॉलिसी रिन्यूअल रिकॉर्ड
  • क्लेम हिस्ट्री (यदि कोई क्लेम लिया गया हो)
  • पहचान और पते का प्रमाण (KYC)
  • मेडिकल हिस्ट्री या डिक्लेरेशन फॉर्म
  • ग्रुप पॉलिसी के मामले में नियोक्ता द्वारा जारी कवरेज प्रमाण

IRDAI द्वारा जारी हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी नियम (आधिकारिक दस्तावेज़)

यह PDF भारतीय बीमा नियामक IRDAI द्वारा जारी हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी और माइग्रेशन से जुड़े आधिकारिक दिशानिर्देशों को दर्शाती है। इसमें ग्रुप से इंडिविजुअल पॉलिसी में बदलाव, वेटिंग पीरियड, अंडरराइटिंग और आवेदन समय-सीमा से जुड़े नियम शामिल हैं।

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अगर नई पॉलिसी लेनी पड़े तो किन बातों पर ध्यान दें?

यदि किसी कारण से पोर्टेबिलिटी संभव न हो, तो नई पॉलिसी लेते समय वेटिंग पीरियड, पहले से मौजूद बीमारियों का कवरेज, नेटवर्क अस्पताल और कमरे के किराए जैसी शर्तों को ध्यान से समझना ज़रूरी है।

सुपर टॉप-अप: प्रीमियम संतुलित रखने का तरीका

अगर पूरी पॉलिसी महंगी लग रही हो, तो बेस पॉलिसी के साथ सुपर टॉप-अप प्लान एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। इससे बड़े मेडिकल खर्च की स्थिति में सुरक्षा मिलती है और प्रीमियम अपेक्षाकृत कम रहता है।

समझिए कैसे सुपर टॉप-अप आपके पैसे बचाता है (उदाहरण: 30 साल का व्यक्ति, 2025 के अनुमानित प्रीमियम पर)

पॉलिसी का प्रकार कवरेज राशि अनुमानित सालाना प्रीमियम फायदा/नुकसान
केवल बेस पॉलिसी 10 लाख रुपये ₹12,000 - ₹15,000 महंगा है, पर कवरेज सीमित है।
बेस + सुपर टॉप-अप 5 लाख (बेस) + 15 लाख (टॉप-अप) = कुल 20 लाख ₹6,000 (बेस) + ₹2,000 (टॉप-अप) = ₹8,000 आधे प्रीमियम में दोगुना कवरेज!
नोट: यह प्रीमियम केवल एक उदाहरण है। वास्तविक कीमत आपकी उम्र, शहर और कंपनी पर निर्भर करेगी।

निष्कर्ष:

नौकरी छूटना अचानक हो सकता है, लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस की तैयारी पहले से की जा सकती है। कंपनी के बीमा पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, समय रहते पोर्टेबिलिटी और पर्सनल पॉलिसी के विकल्प समझना बेहद ज़रूरी है। सही जानकारी और सही समय पर लिया गया निर्णय आपको और आपके परिवार को बड़े आर्थिक जोखिम से बचा सकता है।

"याद रखें, नौकरी दोबारा मिल सकती है, लेकिन बीमारी के दौरान गंवाया गया समय और पैसा वापस नहीं आता। इसलिए आज ही अपनी पॉलिसी के कागज चेक करें।"

अस्वीकरण

यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी या नई पॉलिसी लेने से पहले अपने बीमा सलाहकार या संबंधित बीमा कंपनी से वर्तमान नियमों और शर्तों की पुष्टि अवश्य करें।

हाँ, IRDAI के माइग्रेशन नियमों के तहत आपको यह अधिकार मिलता है। लेकिन इसके लिए आपको कंपनी छोड़ने से पहले या तुरंत बाद बीमाकर्ता को सूचित करना होगा। अगर बहुत देर हो गई, तो यह लाभ नहीं मिलेगा।

अगर आप सही समय पर 'पोर्ट' या 'माइग्रेट' करते हैं, तो आपने ग्रुप पॉलिसी में जितने साल बिताए हैं, उनका क्रेडिट आपको मिलेगा। यानी वेटिंग पीरियड जीरो से शुरू नहीं होगा। यह इसका सबसे बड़ा फायदा है।

हाँ, नियम वही रहते हैं। पॉलिसी ग्रुप की है, कंपनी बंद होने से आपका 'क्रेडिट' खत्म नहीं होता। आपको बस समय रहते बीमा कंपनी (TPA या Insurer) से संपर्क करके अपनी इच्छा जतानी होगी।

हाँ, अक्सर पर्सनल पॉलिसी का प्रीमियम ग्रुप पॉलिसी (जो कंपनी देती थी) से महंगा होता है। क्योंकि ग्रुप में रिस्क बंट जाता है, जबकि इंडिविजुअल में रिस्क केवल आप पर है। लेकिन यह सुरक्षा कवरेज जारी रखने की कीमत है।

यह बीमा कंपनी की अंडरराइटिंग पॉलिसी पर निर्भर करता है। अगर आपकी उम्र ज्यादा है या क्लेम हिस्ट्री है, तो कंपनी मेडिकल चेकअप मांग सकती है।

26 दिसंबर 2025

   

भारत में ज़रूरी बीमा: कौन-सा बीमा कब और क्यों लें?

कौन-सा बीमा कब और क्यों लें
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जीवन बीमा बाजार में आपका स्वागत है! बीमा वित्तीय नियोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि यह अप्रत्याशित जोखिमों के कारण होने वाली वित्तीय हानि से बचाता है।

जोखिम कई तरह के हो सकते हैं, इसलिए इन कई तरह के जोखिमों से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए कई तरह के बीमा होते हैं। इनमें से प्रत्येक के अपने लाभ और उद्देश्य हैं। जीवन बीमा बाजार के इस लेख में, हम विभिन्न प्रकार के बीमा के बारे में जानेंगे कि आपको उनकी आवश्यकता क्यों होगी?

    जीवन बीमा

    जीवन बीमा व्यक्ति के स्वयं के जीवन को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। कहने का आशय यह है कि आर्थिक दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का मूल्य है। आपके जीवन के उस आर्थिक मूल्य को सुरक्षित रखने का कार्य जीवन बीमा के माध्यम से होता है।

    भारत में जीवन बीमा के लिए कई तरह के प्लान उपलब्ध हैं। इनमें टर्म इंश्योरेंस प्लान, होल लाइफ इंश्योरेंस प्लान, एंडोमेंट टाइप इंश्योरेंस प्लान, मनी बैक इंश्योरेंस प्लान और यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान शामिल हैं। जीवन बीमा योजना उन व्यक्तियों के लिए बहुत उपयोगी साबित होती है, जिनके आश्रित हैं और वे अपनी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं।

    स्वास्थ्य बीमा

    भारत में मेडिकल खर्च बहुत अधिक है। जिसके कारण एक सामान्य परिवार के लिए अच्छी स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करना बहुत मुश्किल हो जाता है। स्वास्थ्य बीमा आपको और आपके परिवार को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने में सहायता प्रदान करता है।

    स्वास्थ्य बीमा में बीमारी, चोट या अस्पताल में भर्ती होने के कारण होने वाले खर्च के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान है। भारत में स्वास्थ्य बीमा योजनाएँ कवरेज विकल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करती हैं, जिसमें अस्पताल में भर्ती होने का खर्च, गंभीर बीमारी की दवा का खर्च, मातृत्व लाभ और अन्य चिकित्सा खर्च शामिल हैं।

    मोटर बीमा

    भारत में मोटर बीमा खरीदना अनिवार्य है। यह वाहन दुर्घटनाओं के कारण होने वाले नुकसान के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। भारतीय मोटर बीमा योजनाओ में तृतीय-पक्ष देयता को आर्थिक सुरक्षा दी जाती है। इसके अलावा, वाहनों में दुर्घटना के कारण आंशिक या कुल नुकसान को भी कवर किया जाता है।

    गृह बीमा

    भारतीय गृह बीमा योजनाओं में आग, चोरी या प्राकृतिक आपदाओं जैसी घटनाओं के कारण आपके घर या अन्य घरेलू सामान को होने वाले नुकसान के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान होता है। गृह बीमा योजनाएँ घर की संरचना और उसमें रखी सामग्री दोनों के लिए कवरेज विकल्प प्रदान करती हैं।

    गृह बीमा योजना उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होती है जिन्होंने अपने घर के निर्माण में एक बड़ी राशि का निवेश किया है और अपनी संपत्ति को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखना चाहते हैं।

    यात्रा बीमा

    यात्रा बीमा अप्रत्याशित घटनाओं जैसे फ्लाइट कैंसिलेशन, खोया हुआ सामान, मेडिकल इमरजेंसी और ट्रिप कैंसलेशन के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। इस प्रकार का बीमा विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है जो व्यवसाय या अन्य कारणों से अक्सर यात्रा करते हैं। भारत में यात्रा बीमा पॉलिसी विभिन्न कवरेज विकल्प प्रदान करती हैं, जिसमें यात्रा रद्दीकरण, सामान खो जाना और आपातकालीन चिकित्सा व्यय शामिल हैं।

    व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा

    व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा दुर्घटना के कारण मृत्यु या विकलांगता के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। इस प्रकार का बीमा चिकित्सा व्यय, विकलांगता लाभ और दुर्घटना मृत्यु लाभ के लिए कवरेज प्रदान कर सकता है। व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा उन व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो उच्च जोखिम वाली नौकरियों में काम करते हैं या ऐसी गतिविधियों में संलग्न होते हैं जिनमें चोट लगने का उच्च जोखिम होता है।

    व्यवसाय बीमा

    व्यवसाय बीमा आपके व्यवसाय को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। यह बीमा छोटे-बड़े व्यवसायियों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होता है। व्यवसाय बीमा आग, चोरी, प्राकृतिक आपदाओं आदि जैसी अप्रत्याशित घटनाओं के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। भारत में व्यवसाय बीमा पॉलिसी संपत्ति के नुकसान, व्यापार में रुकावट, देनदारी के दावों और कर्मचारी संबंधी जोखिमों के लिए कवरेज विकल्प प्रदान करती हैं।

    साइबर बीमा

    टेक्नोलॉजी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से साइबर बीमा भारतीय कारोबारियों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है। साइबर बीमा साइबर हमलों, डेटा उल्लंघनों और अन्य साइबर जोखिमों के विरुद्ध वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। इस प्रकार का बीमा डेटा रिकवरी, व्यवसाय में रुकावट, देनदारी के दावों और साइबर हमलों के कारण होने वाले खर्चों को कवर कर सकता है।

    फसल बीमा

    फसल बीमा मूल रूप से किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। फसल बीमा प्राकृतिक आपदाओं और अन्य कारणों से फसल के नुकसान के खिलाफ किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। भारत में फसल बीमा पॉलिसी फसल क्षति, उपज हानि और अन्य संबंधित खर्चों के लिए कवरेज विकल्प प्रदान करती है।

    पालतू पशु बीमा

    पालतू पशु बीमा उन लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होता है जो अलग-अलग तरह के जानवरों को रखते हैं या उनका व्यापार करते हैं। पालतू पशु बीमा पशु के चिकित्सा व्यय और अन्य संबंधित लागतों के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। इस प्रकार का बीमा पालतू जानवरों के ऐसे मालिकों के लिए अधिक फायदेमंद होता है जो अपने पालतू जानवरों के लिए पशु चिकित्सा सेवाओं के बारे में चिंता नहीं करना चाहते हैं।

    विकलांगता बीमा

    विकलांगता बीमा एक स्वस्थ व्यक्ति को बीमा सुरक्षा प्रदान करता है यदि वह अचानक अप्रत्याशित कारणों से विकलांग हो जाता है। जब एक स्वस्थ व्यक्ति अपाहिज हो जाता है तो उसकी कमाने की क्षमता समाप्त हो जाती है। विकलांगता बीमा ऐसे लोगों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। विकलांगता बीमा खोई हुई आय, चिकित्सा व्यय और अन्य संबंधित लागतों के लिए कवर प्रदान करता है। विकलांगता बीमा विशेष रूप से उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है जो उच्च जोखिम वाली नौकरियों में काम करते हैं।

    समुद्री बीमा

    समुद्री बीमा समुद्री परिवहन से संबंधित नुकसान या क्षति के खिलाफ व्यक्तियों और व्यवसायों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। इस प्रकार का बीमा समुद्री परिवहन से संबंधित कार्गो क्षति, हल क्षति और देयता दावों के लिए कवरेज प्रदान करता है। समुद्री बीमा विशेष रूप से उन व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने संचालन के लिए समुद्री परिवहन पर निर्भर हैं।

    दायित्व बीमा

    दायित्व बीमा मूल रूप से व्यक्तियों और व्यवसायों को चोट, संपत्ति की क्षति या उनके कार्यों के कारण होने वाली किसी भी प्रकार की हानि से संबंधित दावों के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा का प्रावधान है। दायित्व बीमा योजनाएँ बीमा कानूनी शुल्क, निपटान लागत और अन्य संबंधित खर्चों के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं। देयता बीमा उन व्यवसायों के लिए अधिक फायदेमंद है जो देयता दावों का उच्च जोखिम उठाते हैं।

    पेशेवर क्षतिपूर्ति बीमा

    व्यावसायिक क्षतिपूर्ति बीमा व्यक्तियों और उनके पेशे से संबंधित व्यवसायों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। व्यावसायिक क्षतिपूर्ति बीमा योजना आपके पेशे में की गई लापरवाही या गलतियों से होने वाले दावों के विरुद्ध वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। यह बीमा कानूनी शुल्क, निपटान लागत और अन्य संबंधित खर्चों के लिए कवरेज प्रदान करता है। पेशेवर क्षतिपूर्ति बीमा योजना डॉक्टर, वकील, आर्किटेक्ट और इंजीनियर जैसे पेशे से जुड़े लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होती है।

    शिक्षा बीमा

    शिक्षा बीमा बच्चों की शिक्षा की उच्च लागत के विरुद्ध व्यक्तियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। इस बीमा के तहत ट्यूशन फीस, रहने का खर्च और अन्य संबंधित खर्चों के लिए प्रावधान किया जा सकता है। शिक्षा बीमा विशेष रूप से उन माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण है जो यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके बच्चे की उच्च शिक्षा बिना किसी चिंता के पूरी हो सके।

    फ़ाइल डाउनलोड करें

    यदि आप एक जीवन बीमा एजेंट हैं और बीमा संबंधी जानकारी पेशेवर ढंग से प्रस्तुत करना चाहते हैं। फिर आप नीचे दी गई 7-ज़िप फ़ाइल डाउनलोड कर सकते हैं और आप इसका व्यक्तिगत उपयोग कर सकते हैं।

    ये सभी फ़ाइलें कॉपीराइट शर्तों के अधीन हैं और इन्हें व्यक्तिगत उपयोग की अनुमति है। आप इन फ़ाइलों को किसी भी रूप में सोशल मीडिया पर साझा नहीं कर सकते हैं। उपयोग से पहले हमारे नियम और शर्तों को पढ़ना उचित है। नियम और शर्तों की फाइल डाउनलोड फोल्डर में पीडीएफ फॉर्मेट में उपलब्ध है।

    फॉन्ट फैमिली: Noto Sans Devanagari (Google Font)

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    निष्कर्ष

    भारत में कई अलग-अलग प्रकार के बीमा विकल्प उपलब्ध हैं, जो अप्रत्याशित घटनाओं के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करते हैं। आपको यह तय करना होगा कि किस प्रकार का बीमा आपके लिए सबसे उपयोगी है। बीमा के लिए निर्णय लेते समय आपको अपनी संपत्ति की सुरक्षा और वित्तीय भविष्य को ध्यान में रखना चाहिए।

    जब आप सही बीमा चुनते हैं, तो आप यह सुनिश्चित करते हैं कि आप और आपका परिवार किसी भी अप्रत्याशित घटना के कारण वित्तीय नुकसान से सुरक्षित है। यह विचार आपके मन को शांत और खुश महसूस कराता है।

       

    LIC Survey Form: आख़िरी 5 सवाल जो पॉलिसी दिलाते हैं

    Read in English »

    दोस्तों, सर्वे फॉर्म के जरिये काम करते समय आपका उदेश्य महत्वपूर्ण होता है। अगर आपका उदेश्य सिर्फ आंकड़े इक्क्ठा करना होता है, तो आप इस माध्यम का उपयोग करके अधिक सफल नहीं हो सकते हैं। मेरे अनुसार प्रत्येक सर्वे में आपका उदेश्य होना चाहिए कि आप अपने क्षेत्र के लोगों के मन में यह भरोषा पैदा कर सके कि आप बिना किसी स्वार्थ के उनके बारे में चिंता करते हैं, आपको अपने क्षेत्र की विस्तृत जानकारी है और आप एक अच्छी विचारधारा वाले एलआईसी के प्रोफेशनल एजेंट हैं।

    मुझे पूरा भरोषा है कि एलआईसी सर्वे फॉर्म के पिछले प्रश्नो तक आप अपनी ऐसी छवि को विकसित कर चुके होते हैं। अब सर्वे फॉर्म के आखरी पांच सवालों की बारी है। इन सवालों के जरिये आपको यह सुनिश्चित करना है कि लोग आपको अपने भविष्य की वित्तीय योजनाओं में मदद करने के लिए एक सलाहकार के रूप में शामिल करें।

    तो आइये अब एलआईसी सर्वे फॉर्म के आखरी पांच प्रश्नो को जानते है और समझने का प्रयास करते हैं कि सर्वे के दौरान आपके यह प्रश्न लोगों से कैसे पूछने चाहिए, ताकि लोग सिर्फ आपको उत्तर ही न दें, बल्कि अपनी वित्तीय योजनाओं में आपको सलाहकार के रूप में आमंत्रित भी करें।

    सर्वे फॉर्म के आखरी पांच प्रश्न: अभिकर्ता का लक्ष्य

    सर्वे फॉर्म के शुरूआती प्रश्नो से आपने अपने व्यक्तित्व को एक संवेदनशील और प्रोफेशनल अभिकर्ता के रूप स्थापित करने हेतु प्रयास किया है। अब जरुरत है कि आप लोगों से अनुमति लें कि आप जब चाहे, उनसे जीवन बीमा से जुडी बातचीत के लिए सम्पर्क कर सके और सर्वे फॉर्म के आखरी पांच प्रश्न आपके इसी कार्य को आसान बना देते हैं।

    हाँ, यहाँ पर आपके लिए हमारा एक सुझाव है कि जब सर्वे में आप इन प्रश्नो को लोगों से पूछ रहे हों तो ऐसा करते समय आपके बातचीत का लहजा बहुत अधिक सहज, आत्मीय और मददगार होना चाहिए। आपको याद रखना चाहिए कि इन प्रश्नो के लिए, आपको लोगों से सिर्फ "हाँ" नहीं सुनना है, बल्कि उन्हें यह भरोषा दिलाना है कि आप उनके और उनके परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा और भविष्य के सपनो के साथी बन सकते हैं।

    तो चलिए, अब बारी-बारी से सर्वे फॉर्म के आखरी पांच प्रश्नो के लिए विस्तार से चर्चा करते हैं।

    क्या आप हमारी फ्री डोर सर्विस का लाभ प्राप्त करना चाहेंगे?

    सर्वे फॉर्म का यह प्रश्न बहुत अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि आप इसके जरिये लोगों को यह एहसास दिलाते हैं आप सिर्फ बीमा विक्री नहीं करते हैं, बल्कि आपने अभी तक जिस किसी को भी जीवन बीमा पॉलिसी बेचीं है उनको एक उत्कृष्ट सर्विस भी प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, परोक्ष रूप से आप यह एहसास दिलाने का प्रयास करते हैं कि अगर वह भी पहले से आपसे ही पॉलिसी ख़रीदे होते तो उनको भी ऐसी उत्कृष्ट सेवाएं फ्री में मिलती रहती।

    तो ऐसा करने के लिए आप इस प्रश्न को कुछ इस तरह से पूछ सकते हैं-

    "हम अपने पॉलिसीधारकों को बिना किसी शुल्क के फ्री डोर सर्विस प्रदान करते हैं - जैसे उनके पॉलिसी के प्रीमियम एवं भुगतान की सूचना देना, विभिन्न वित्तीय अपडेट, जीवन बीमा उद्योग में होने वाले अपडेट के बारे में बताना, इत्यादि। क्या आप भी यह लाभ लेना चाहेंगे?"

    यदि व्यक्ति ने आपके ऐसा पूछने पर "हाँ" कह दिया, तो इसका मतलब यह है कि वह अप्रत्यक्ष रूप से आपको अपने घर आने और फोन पर सम्पर्क करने की अप्रत्यक्ष अनुमति दे दी है। यह भविष्य में आपके लिए नियमित मुलाकातों का माध्यम बन सकता है, जिससे आप विश्वास और व्यवसाय दोनों को मजबूत कर सकते हैं।

    क्या आप चाहते हैं कि आपको एलआईसी की नई योजनाओं की जानकारी समय-समय पर मिलती रहे?

    एलआईसी सर्वे फॉर्म का यह प्रश्न इनफार्मेशन शेयरिंग के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण है, इस प्रश्न के लिए अनुमति लेकर आप यह सुनिश्चित करते हैं कि आप विभिन्न प्रकार के प्लेटफार्म जैसे WhatsApp, टेलीग्राम इत्यादि का उपयोग करके लोगों को एलआईसी की योजनाओं के बारे में जानकारी दे सकते हैं।

    आप इस प्रश्न को कुछ इस तरह से पूछ सकते हैं-

    "एलआईसी अपने पॉलिसीधारकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर नई योजनाएं लांच करती रहती है। यह लोगों के जीवन के अलग-अलग लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार सिद्ध होती है। तो क्या आप चाहते हैं कि मैं ऐसी जानकारी आपको साझा करता रहूं।"

    इस प्रश्न का उत्तर यदि "हाँ" में मिलता है, तो यह इस बात का संकेत है कि व्यक्ति आपकी अपडेट प्राप्त करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसका लाभ आपको यह हो सकता है कि आप ऐसे व्यक्ति मैसेज, WhatsApp अथवा कॉल के जरिये उनके सम्पर्क में रह सकते हैं। जिससे भविष्य में आपके बीमा विक्री की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

    क्या आपको अपनी बेटी के विवाह हेतु वित्त की आवश्यकता है?

    सर्वे फॉर्म का यह प्रश्न बहुत अधिक संवेदनशील है, क्योकि यह प्रश्न भावनात्मक जुड़ाव पैदा करता है। इसलिए इस प्रश्न को पूछते समय आपका स्वर सहानुभूतिपूर्ण और आदरपूर्ण होना चाहिए। आप इस प्रश्न को कुछ इस तरह पूछ सकते हैं-

    "हर माता-पिता अपनी बिटिया का विवाह योग्य वर के साथ करना चाहता है, वह चाहता है कि उसकी बेटी की शादी सम्मानपूर्वक और सुखद वातावरण में हो। क्या आप भी इस उदेश्य की पूर्ति हेतु कोई आर्थिक योजना बनाना चाहते हैं?"

    यदि व्यक्ति "हाँ" कहता है, तो आपके लिए एक सुनहरा मौका मिल जाता है, जब आप जल्द ही उस व्यक्ति से पॉलिसी विक्री हेतु सम्पर्क कर सकते हैं। यह प्रश्न न केवल व्यक्तियों के संभावित जरूरतों का आकलन करने में आपकी मदद करता है, बल्कि उनके भावनात्मक विश्वास को मजबूती देने का भी काम करता है।

    क्या आपको अपने बच्चों की उच्च शिक्षा हेतु वित्त की आवश्यकता है?

    याद रखिये, सर्वे फॉर्म का यह प्रश्न न केवल बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, बल्कि उस व्यक्ति के सपनो से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इस प्रश्न को आर्थिक एवं जोश भरे शब्दों के साथ पूछना बेहतर होता है। कुछ इस तरह से-

    "हर माता-पिता अपने बच्चों को सफल देखना चाहता है लेकिन बढ़ती हुई महंगाई और उच्च शिक्षा के लिए होने वाले खर्च हर माता-पिता के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती खड़े कर देती है। तो क्या आप भी चाहते हैं कि आपने अपने बच्चों के लिए जो कुछ भी सपने देखें है उसे पूरा करने में आपको आर्थिक समस्याओं का सामना न करना पड़े और क्या आपने इसके लिए पहले से कोई प्रबंध किया हुआ है।"

    जब व्यक्ति "हाँ" कहता है तो वास्तव में वह आपको यह अवसर दे रहा होता है कि यदि आप उसे कनविंस कर लेते हैं तो वह अपने बच्चों की हायर एजुकेशन के लिए आपसे नई पॉलिसी खरीद सकता है। अब तो जरुरत सिर्फ इतनी है कि आप उसे कनविंस कर लें।

    क्या आप वृद्धावस्था पेंशन के लिए धन प्रबंधन करना चाहते हैं?

    यह एक ऐसा प्रश्न है जो आपको प्रत्येक सर्वे में बीमा विक्री संभावना देता है। अन्य प्रश्नो को देखें तो नहीं की संभावना हो सकती है। उदाहरण के लिए हो सकता है किसी व्यक्ति की बिटिया न हो या बेटा न हो। लेकिन हर व्यक्ति एक दिन बुजुर्ग जरूर होगा। इसलिए मुझे लगता है कि संभावनाओं के दृष्टिकोण से यह प्रश्न सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

    आप लोगों से यह सवाल कुछ इस तरह पूछ सकते हैं-

    "वर्तमान समय में, बच्चे विवाह के बाद स्वतंत्र जीवन शैली अपनाना चाहते हैं। ऐसे में अधिकतम लोगों को वृद्धावस्था में विभिन्न तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह की समस्याओं को देखते हुए आज बहुत सारे लोग अपने बुढ़ापे की व्यवस्था के लिए रिटायरमेंट प्लांनिग कर रहे हैं। तो क्या आप भी अपने लिए कोई ऐसी ही प्लानिंग करना चाहते हैं।"

    अगर सर्वे में इसका उत्तर आपको "हाँ" में मिलता है, तो यह आपके लिए संकेत है कि भविष्य में वह व्यक्ति आपका अपना पॉलिसीधारक बन सकता है। एलआईसी की पेंशन योजनाओं को बेहतर तरीके से दिखाकर, आप ऐसे लोगों को पॉलिसी बेच सकते हैं।

    सर्वे फॉर्म का नोट्स सेक्शन

    अब उपरोक्त प्रश्न के बाद आपका सर्वे समाप्त हो जाता है। मुझे यह पूरा विश्वास है कि इस कोर्स में दिए गए सिद्धांतो का पालन करते हुए आप अपने सफलता के प्रथम पावदान को बहुत ही बेहतरीन तरीके से पूर्ण कर लेंगे।

    लेकिन सर्वे पूरा करना और यह मान लेना कि सिर्फ इतना करके आप सफल हो जायेंगे तो यह बहुत ही गलत निर्णय होगा। सर्वे पूरा होने के बाद ही एक नई शुरुआत होती है जब आपको अपने कारोबारी रिश्ते विकसित करने होते हैं और बीमा विक्री को सफल करना होता है।

    प्रत्येक सर्वे के लिए आपको लक्ष्य बनाना चाहिए कि चाहे कितनी भी कोशिस क्यों न करनी पड़े, आप करेंगे लेकिन आप प्रत्येक सर्वे में शामिल व्यक्ति से सफल बीमा विक्री जरूर प्राप्त करेंगे और ऐसा करने के लिए अब बेहद जरुरी है कि पुरे सर्वे से प्राप्त उत्तरों के आधार पर आप सर्वे में शामिल व्यक्ति से डाटा प्राप्त करें और उसे नोट करें।

    इस बात को वीडियो में विस्तार से समझाया गया है आपको यह वीडियो जरूर देखना चाहिए।

    निष्कर्ष

    मैं एक बार फिर से कहूंगा कि एलआईसी सर्वे फॉर्म सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं है। यह आपकी सफलता का दरवाजा है। मुझपर भरोषा करें और इस पुरे कोर्स को जरूर करें। मैं यह दावे से कह सकता हूँ कि यदि सही दिशा में आप इस सर्वे फॉर्म के माध्यम से कार्य करते हैं तो एलआईसी के बड़े से बड़े टारगेट को बहुत ही आसानी से पूर्ण कर सकते हैं।

    इस कोर्स के समापन पर, मैं माँ सरस्वती से सच्चे मन से प्रार्थना करता हूँ-
    “माँ सरस्वती से मेरी प्रार्थना है कि इस प्रशिक्षण को पूर्ण करने वाले हर शिक्षार्थी पर अपनी कृपा बरसाएँ।
    वे जीवन बीमा जैसे पुण्य कार्य के माध्यम से समाज की सेवा करें और उनके जीवन में सफलता, समृद्धि और सम्मान के उजियारे सदा बने रहें।”